Jemiya


About Jemiya, we can know:
1. her parts,
2. her uniqueness,
3. her connections,
4. her sensitivities,
5. her forms,
6. her substitutes, and
7. her uses.
What else can we know about her?

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6 Responses to Jemiya

  1. Savitha says:

    सुबह होने पर रोज़ की तरह बसंती पहले उठी तो वो अपने बेटे को नंगा सोया हुआ देख कर चौक गयी. वो चांग के लंड को देख कर आश्चर्यचकित हो गयी. उसे पता नहीं था कि उसके बेटे का लंड अब जवान हो गया है और उस पर इतने घने बाल भी हो गए है. वो समझ गयी कि उसका बेटा अब जवान हो गया है. उसके लंड का साइज़ देख कर भी वो आश्चर्यचकित थी क्यों कि उसने आज तक अपने पति के लंड के सिवा कोई और जवान लंड नहीं देखा था. उसके पति का लंड इस से छोटा ही था. हाय, कितना मस्त लंड है इसका लंड इतना बड़ा हो गया है और मुझे पता भी नहीं चला. काश एक बार ऐसा लंड मेरे चूत में मिल जाता. कमबख्त ! कितने दिन हो गए चुदाई हुए.

    वो अभी सोच ही रही थी कि अचानक चांग की आँख खुल गयी और उसने अपने आप को अपनी माँ के सामने नंगा पाया. वो थोडा भी शर्मिंदा नहीं हुआ और आराम से गमछा को लपेटा और कहा – वो रात में काफी गरमी थी , इसलिए मैंने गमछा खोल दिया था. वैसे, जब तू यहाँ नही रहती थी तो मै तो इसी तरह ही सोता था.
    बसंती थोडा सा मुस्कुरा कर कहा – तो अभी भी सो जाया करो न बिना कपडे के. मुझसे शर्म कैसी? मै अभी तेरे लिए चाय बना देती हूँ.

    चांग ने सिगरेट के कश लेते हुए कहा – अच्छा ? तुम्हे कोई दिक्कत नहीं?

    बसंती – नहीं रे, अपने बच्चे से क्या दिक्कत?

    बसंती किचन में चाय बनाने तो चली गयी लेकिन वो चांग के लंड को देख कर इतनी गर्म गयी कि किचन में ही उसने अपने चूत में उंगली डाल कर मुठ मार लिया. तब कहीं उसे शान्ति मिली.

    उसी रात बसंती फिर से सिर्फ ब्रा और पेंटी पहन कर चांग के बगल में सोयी. चांग ने आधी रात को कर अपना गमछा पूरी तरह खोल दिया था और बसंती के उठने से ठीक पहले पेशाब लगने की वजह से उठ गया और नंगे ही बाथरूम जा कर वापस आया और अपनी माँ के बगल में लेट गया. चांग ने देखा कि बसंती की छोटी और पतली पेंटी थोड़ी नीचे सरक गयी है जिस से बसंती की चूत के बाल स्पष्ट दिख रहे थे. इस वीभत्स नज़ारे को देख कर चांग का लंड तनतना गया. और अपने लंड को सहलाने लगा. तभी बसंती की नींद खुलने लगी. ये देख कर चांग झट से अपनी अपने लंड को एक हाथ से पकडे हुए रखा और आँखे बंद कर के सोने का नाटक करने लगा. कुछ ही पल में ज्यों ही बसंती उठी तो देखती है कि उसका बेटा लंड तनतनाया हुआ है. और एक हाथ से चांग उसे धीरे धीरे सहला रहा है. बसंती का दिमाग फिर से गर्म हो गया.

    वो चांग के बगल में लेटे कर चांग के खड़े लंड को निहारते हुए सोचने लगी – हाय, अपने बेटे का ही लंड मुझे मिल जाए तो क्या बात है? साले का लंड इतना सुन्दर है कि मन कर रहा है कि अभी मुह में ले कर चूसने लगूं .

    पांच मिनट तक उसके लंड को निहारने के बाद वो चांग से सट कर लेट गयी और अपने चूची को उसके नंगे सीने पर दबाते हुए और प्यार से उसके सीने पर हाथ फेरते हुए चांग को जगाया. चांग तो जगा हुआ था ही. वो आँख खोला तो अपनी माँ को अपने अपने नंगे बदन में सटा हुआ पा कर उसका लंड और भी कड़क हो गया.
    बसंती का बदन भी लगभग नंगा था. और जो थोडा बहुत बचा हुआ था वो भी बसंती दिखने से परहेज नहीं कर रही थी. उसने भी तक अपनी पेंटी को ऊपर नहीं किया था और उसकी बड़ी -बड़ी और काली झांट बिलकूल खुलेआम दिख रहे थे. ये देख कर चांग का लंड और टाईट हो गया. बसंती ने भी सोच लिया कि जब तक चांग को अपनी चूत के बाल और चूची दिखा कर गर्म कर दूंगी.

    चांग ने कहा – कल रात भी बहुत गरमी थी ना इसलिए पुरे कपडे खोल के नंगे ही सो गया था.

    बसंती ने चांग के नंगे पेट को सहलाते हुए मुस्कुरा कर कहा – तो क्या हुआ? यहाँ कौन दुसरा है? मै क्या तुझे नंगा नहीं देखी हूँ? माँ के सामने इतनी शर्म कैसी?

    चांग – वो तो मेरे बचपन में ना देखी हो. अब बात दूसरी है.

    बसंती – क्यों अब , क्या दूसरी बात है? दो साल पहले तक तो तू मेरे साथ नंगे ही सोता था. मेरे आँखों के सामने ही ना तेरे लंड पर बाल आये थे . लंड पर बड़े बड़े बाल हो गए थे तब भी तू मेरे साथ नंगा ही चिपक कर सोता था.

    बसंती का हाथ थोडा और नीचे गया चांग के लंड के बालों को खींचते हुए हुए बोली – पहले और अब में क्या फर्क है ? यही ना तेरे बाल अब थोडा बड़े बड़े हो गए हैं और तेरा लंड भी पहले से बड़ा और मोटा हो गया है , और क्या? अब मेरा बेटा जवान हो गया है. लेकिन माँ के सामने शर्माने की जरुरत नहीं. आज से तूझे मेरे सामने कपडे पहन कर सोने की कोई जरुरत नहीं है. मै तेरे शरीर के हर हिस्से को जानती हूँ. मुझसे परदा करने की कोई जरुरत नहीं है तुझे, मेरे बेटे. जा जाकर बाथरूम में पिशाब कर. देख कब से तेरे को पिशाब लगी है.

    चांग – तुझे कैसे पता चला माँ, मुझे जोरों से पिशाब लगी है?

    बसंती ने हौले से चांग के लंड को पकड़ा और सहलाते हुए कहा – - तेरा लंड इतना टाईट हो गया है. इस से मै समझ गयी. जा जल्दी जा, फिर हम चाय पियेंगे.

    चांग – माँ, सिर्फ पिशाब ही नहीं करना है मुझे…कुछ और भी करना पड़ता है.

    बसन्ती ने हँसते हुए कहा – जा ना तो. कर ले वो भी. मै सब समझती हूँ कि क्या करता है तू आजकल.

    चांग हँसते हुए नंगे ही बाथरूम गया. लेकिन वहां उसने सिर्फ पिशाब ही नही किया बल्कि अपनी माँ की मस्त चूची को याद कर कर के मुठ मारने लगा. साथ ही साथ वो जोर जोर से आह आह की आवाजें भी निकाल रहा था ताकि उसकी माँ सुन सके. बसंती ने सचमुच उसकी आवाज़ सुन ली और वो समझ गयी कि उसका बेटा बाथरूम में मूठ मार रहा है. सुन के वो फिर मस्त हो गयी. वो भी किचन में गयी और अपनी चूत की मुठ मारने लगी. यानी आग इधर भी लग गयी थी और उधर भी.

    चांग अब नंगा ही सोने लगा. और उधर बसंती उसके सामने ही अपनी पेंटी में हाथ डाल कर अपने चूत को सहलाती रहती थी. उसके लंड को याद कर कर के रात को बिस्तर पर ही मुठ मारती रही. अगले दो दिन के बाद रात में आधी रात को चांग अपने खड़े लंड को मसलने लगा. माँ के चूत और चूची को याद कर कर के उसने बिस्तर पर ही मुठ मार दिया. सारा माल उसके बदन पर एवं बिस्तर पर जा गिरा. एक बार मुठ मारने से भी चांग का जी शांत नहीं हुआ. 10 मिनट के बाद उसने फिर से मुठ मारा. इस बार मुठ मारने के बाद उसे गहरी नींद आ गयी. और वो बेसुध हो कर सो गया. सुबह होने पर बसंती ने देखा कि चांग रोज़ की तरह नंगा सोया है और आज उसके बदन एवं बिस्तर पर माल भी गिरा है. उसे ये पहचानने में देर नहीं हुई कि ये चांग का वीर्य है. वो समझ गयी कि रात में उसने बिस्तर पर ही मुठ मारा होगा. लेकिन वो जरा भी बुरा नहीं मानी. वो गौर से अपने बेटे का लंड देखने लगी. वो उसके बगले में लेट गयी और और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए उसे उठाई. चांग की ज्यों ही नींद खुली बसंती ने उसके लंड पर हाथ फेरते हुए कहा -देख तो, तुने क्या किया?, कल रात को तुने बिस्तर पर ही अपने लंड से माल निकाला था क्या?

    चांग – हाँ माँ, वो बिस्तर पर ही दो बार मार लिया.

    बसंती ने कहा – कोई बात नहीं बेटा, जा कर बाथरूम में अपना बदन साफ़ कर ले. मै बिछावन साफ़ कर लुंगी.

    चांग बिना कपडे पहने ही बाथरूम गया. और अपने बदन पर से अपना वीर्य धो पोछ कर वापस आया तब उसने तौलिया लपेटा. तब तक बसंती ने वीर्य लगे बिछावन को हटा कर नए बिछावन को बिछा दिया.

    फिर उस रात ज्यों ही बिस्तर पर दोनों लेटे त्यों ही चांग ने मुठ मारना शुरू कर दिया. बसंती अँधेरे में चांग को देख तो नही पा रही थी लेकिन वो समझ गयी कि चांग मुठ मार रहा है. वो भी गर्म हो गयी. उसने भी अपनी पेंटी खोल दी और अपने चूत में उंगली डाला और वो भी शुरू हो गयी. अब दोनों ही बिस्तर पर एक साथ मुठ मार रहे थे. हालांकि चांग नही जान पाया कि उसकी माँ भी मुठ मार रही है. उसने अचानक कहा – माँ कोई कपड़ा दे ना. माल निकालना है.

    बसन्ती ने अपनी पेंटी उसके हाथ में थमा दी और बोली – इसमें निकाल ले.

    चांग – क्या है ये?

    बसंती – जो भी है, तू माल निकाल इसी में.

    चांग ने जोरदार आवाज के साथ अपनी पिचकारी छोड़ी और सारा माल अपनी माँ की पेंटी में गिरा दिया. फिर उसने वो पेंटी अपनी माँ को थमा दिया. अब बसंती ने भी अपना माल उसी पेंटी में गिराया फिर उस पेंटी को पहन ली.दोनों अपने अपने माल को निकाल कर निढाल हो कर सो गए. लेकिन बसंती की आग बढ़ती ही जा रही थी.
    अगली रात बसंती ने सिर्फ ब्रा और पेंटी पहना था. जबकि चांग बिलकूल नंगा सोया था. चांग और बसंती रोज़ की तरह एक ही बिस्तर पर आस पास ही सोये हुए थे. आधी रात को चांग ने अपना एक हाथ बसंती के चूची के ऊपर रख दिया. बसंती उसकी तरफ पीठ कर के सोयी थी. चांग ने ज्यों ही उसके ऊपर हाथ रखा वो जाग गयी लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. चांग धीरे धीरे बसंती के बदन में सट गया और उसकी चुचियों और जांघ पर हाथ फेरने लगा. हालांकि उसे पता चल गया था कि उसकी माँ जाग गयी है वो अपने लंड को बसंती के गांड के ऊपर सहलाने लगा. बसंती को मस्ती चढ़ रही थी. उसे भी अपने बेटे का लंड अपने गांड पर चुभना काफी अच्छा लग रहा था. अचानक वो सीधे हो के लेट गयी. अब चांग उसके दोनों चुचियों को आराम बारी बारी से दबा रहा था. चांग धीरे धीरे अपनी माँ से पूरी तरह सट गया. अब चांग को ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ चांग ने अपनी एक टांग बसंती के ऊपर चढ़ाई फिर धीरे धीरे उसके बदन पर पूरा चढ़ गया. बसंती सिर्फ गरम गरम साँसे फ़ेंक रही थी. चांग का लंड बसंती के पेंटी के ऊपर था और ऐसा लग रहा था की उसकी पेंटी को फाड़ कर बसंती की चूत की चुदाई कर देगा. चांग ने अपने होठों को बसंती के होठों से सटाया. बसंती ने अपना मुंह खोला और उसके उसके होठों को चूमने लगी फिर चूसने लगी.

    बसंती ने अपने दोनों हाथ को चांग के पीठ पर लाया और धीरे से कहा – क्या चाहिए बेटे?

    चांग – मुझे तेरे चूत पर माल निकालना है.

    बसंती – तो निकाल ले ना.

    चांग – आज तू मार दे ना मेरी मुठ.

    बसंती – ठीक है. आ जा मेरे ऊपर. दे अपना लंड मेरे हाथ में.

    चांग बसंती के बदन पर चढ़ गया और बसंती ने उसके लंड को अपने हाथ में ले कर उसका मुठ मारने लगी. आज बसंती अपने जवान बेटे के लंड के साथ खेल रही थी. थोड़ी ही देर में उसका लंड ने माल निकालना शुरू कर दिया. चांग ने अपने लंड को अपनी माँ के चूत के पेंटी के ऊपर सटा दिया और सारा माल बसंती के पेंटी पर गिरा दिया. बसंती चुप-चाप उसके गर्म गर्म वीर्य से अपने पेंटी को भींगते रहने का अहसास करती रही. और मन ही मन खुश होती रही कि अब उसका बेटा ही उसकी प्यास शांत करने के लिए तैयार हो रहा है.

    चांग मुठ मरवाने के बाद निढाल हो कर अपनी माँ के बदन पर से हट गया और सो गया. बसंती ने भी अपनी पेंटी खोल कर मुठ मारा और पेंटी को वापस पहन कर सो गयी.

    सुबह तक वो उसी पेंटी में थी.. वो चांग के बगले में सट कर बड़े ही प्रेम से चांग को जगाया. चांग जागा तो बसंती ने उसके लंड के बाल में अपनी उंगली फिराते हुए कहा – कल रात तुने कहाँ माल निकाल दिया, तुझे पता है? देख तो मेरी पेंटी का क्या हाल हो गया है? पूरा भींग गया है. रात भर मै इसी तरह सोयी रही. तू भी एकदम पगला है.

    चांग — अभी भी भीगा है क्या?

    बसंती – हाँ, छू के देख ले.

    चांग ने अपनी माँ के पेंटी के ऊपर हाथ फेरा और देखा कि सचमुच अभी तक भींगा है. वो मुस्कुरा के बोला – इसे खोल दे न.

    बसंती – तेरे सामने?

    चांग – अरे नहीं. मेरे कहने का मतलब है इसे खोल कर दूसरी पहन ले.

    बसंती – अच्छा ठीक है. वो कर लुंगी. मुझे कल ही पता चला तेरा लंड काफी बड़ा है रे. मेरा बेटा अब जवान जो हो गया है. चल उठ तैयार हो जा. तुझे कारखाना भी तो जाना है न?
    चांग उस दिन काफी खुश था और काम ख़त्म होते ही वो वापस घर आया और अपनी माँ को ले कर फिल्म दिखाने ले गया. रात को बाहर खाते हुए वापस घर आया और खाना खाते ही अपने सारे कपडे खोल कर नंगा हो गया. फिर माँ के सामने ही लंड को सहलाने लगा और सिगरेट पीने लगा. बसंती ब्रा और पेंटी पहन कर उसके बगल में लेटी हुई थी. चांग ने उसे पकड़ कर उसकी चूची ब्रा के ऊपर को दबाने लगा. बसंती भी चांग के लंड को सहलाने लगी.

    अचानक चांग ने कहा – माँ, तू सिगरेट पीयेगी?

    बसंती – नहीं रे .

    चांग – अरे पी ले, ये बिलकूल गाँव के हुक्के की तरह ही है. वहां तो तू हुक्का पीती थी कभी कभी . ये ले पी सिगरेट .

    कहते हुए अपनी सिगरेट माँ को दे दिया. और खुद दुसरा सिगरेट जला दिया. बसंती ने सिगरेट से ज्यों ही कश लगाया वो थोड़ी खांसी .

    चांग ने कहा – आराम से माँ. धीरे धीर पी. पहले सिर्फ मुह में ले. धुंआ अन्दर मत ले. बसंती ने वैसा ही किया. 3 -4 कश के बाद वो सिगरेट पीने जान गयी. आज वो बहुत खुश थी.

    चांग – माँ एक बात कहूँ.

    बसंती – हाँ बोल.

    चांग – तेरी चूची दबाने में बड़ा मज़ा आता है.

    बसंती – सच कहूँ, तो मुझे भी कल तेरा मुठ मारने में बड़ा मज़ा आया था. . अब जब भी मन हो मेरी चूची दबा लिया करना. इसमें क्या जाता है. तुने इस से दूध पिया है. इस पर तेरा हक है.

    चांग ने अपना हाथ बसंती की चूची पर रख दिया और कहा – इसे खोल ना.. आज मै तेरी ब्रा खोल कर तेरी चूची को दबाना चाहता हूँ.

    बसंती – तो अभी मेरी ब्रा उतार दे. और जितनी मर्जी हो दबा ले

    चांग ने बसंती का ब्रा उतार दिया. दरअसल वो भी अब मस्त होना चाहती थी. वो तो अब पेंटी उतारने के लिए भी तैयार थी.. वो भी चाहती थी कि उसका बेटा उसके बदन को अच्छी तरह से देखे.

    बसंती अब सिर्फ पेंटी में थी. उसकी चूची खुली हवा में विशाल रसगुल्ले की तरह दिख रहे थे. बसंती को सिर्फ पेंटी में और विशाल चूची को यूँ नंगी देख चांग का माथा खराब हो गया. वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी माँ इतनी जवान है. उसका मन किया कि वो लपक कर अपनी माँ की गोरी गोरी चुचियों को मुंह में ले के चूसने लगे. लेकिन उसने अपने आप पे कंट्रोल रखा. लेकिन उसका लंड खड़ा हो गया.

    बसंती उसके बगल में लेट कर सिगरेट के कश ले रही थी.

    चांग ने अपनी माँ की चुचियों को दबाते हुए बोला – हाय, तेरी चूची बड़ी ही गोरी है. एकदम मस्त चूची है तेरी.

    बसंती थोड़ा हँसते हुए कही- हाँ वो तो है.

    चांग – तेरी चूची अभी भी गोल और सख्त ही हैं. लगता है कि किसी लड़की की चूची है.

    बसंती – अच्छा?? लेकिन मुझे तो नही लगता..

    चांग ने कहा – माँ अपनी दूधू पिलाओ ना.

    बसंती ने कहा – अब इसमें दूध थोड़े ही है?

    चांग ने लाड करते हुए कहा – नहीं , मुझे फिर भी पीना है.

    बसंती – अच्छा मेरे बेटे , ले पी ले.

    कह कर बसंती सीधी लेट गयी . चांग बसंती के नंगे बदन पर चढ़ गया और उसकी चूची को अपने मुह ले ले कर चूसने लगा. बसंती तो मस्ती से पागल हुए जा रही थी. वो एक हाथ से चांग के गांड पर हाथ फेर रही थी तथा दुसरे हाथ से चांग के सर को अपनी चूची की तरफ जोर जोर से दबा रही थी. बसंती ने एक हाथ से चांग का लंड पकड़ा और सहलाने लगी.

    बसंती – हाय मेरा बेटा.. कितना बड़ा हो गया है रे तू? तेरा लंड तो तेरे बाप के लंड से भी ज्यादा बड़ा है रे.

    उधर चांग अपनी माँ की चूची को बुरी तरह मसलने और चूसने लगा. बसंती की आँखें मस्ती से बंद हो रही थी.
    वो अपने हाथ से चांग का लंड दबा रही थी. वो बोली – बेटा. तेरा लंड एकदम गरम हो गया है रे.

    चांग – हाँ माँ. ये तेरी गोरी चूची को चूस के गरम हो गया. साले को ठंडा करना पड़ेगा.

    बसंती – तो आ ना, मुठ मार देती हूँ . क्यों सता रहा है खुद को और अपने लंड को?

    चांग – ठीक है. माँ.

    बसंती ने अपने बेटे के लंड को कस के पकड़ा और जोर जोर से मुठ मारने लगी. कल रात को तो उसने अँधेरे में अपने बेटे का मुठ मारा था . आज लाईट में अपने बेटे का मुह दे और लंड देखते हुए मुठ मार रही थी.

    चांग अपनी माँ से बिना किसी शर्म के जोर जोर से मुठ मरवा रहा था और साथ ही जोर जोर से आह आह की आवाज़ भी निकाल रहा था. बसंती को अपने बेटे का मुठ मरवाना देख के मस्ती चढ़ रही थी. वो भी गर्म हो गयी थी. लेकिन वो अभी खुलना नही चाह रही थी. करीब 5 मिनट तक चांग मुठ मरवाने के बाद सिसकारी भरने लगा. चांग अपने आप को संभाल नही पाया और सारा माल अपनी माँ के बदन पर ही उगल दिया. बसंती का पेट और चूची चांग के माल से नहा गया.

    बसंती हँसने लगी और बोली – ये क्या किया तुने मेरे लाल. देख तो सारा माल मेरे चूची पर गिरा दिया.

    चांग – ओह , मै कंट्रोल नहीं कर पाया.

    बसंती – कोई बात नहीं, मेरे लाल , मै साफ़ कर लुंगी. तुझे मज़ा आया न?

    चांग – हाँ माँ, मज़ा तो बहुत आया तुझसे मुठ मरवा कर.

    चांग लेट गया. बसंती बाथरूम जा कर नहायी और फिर पूरी नंगी ही वापस आई. तब तक चांग सो गया था. लेकिन बसन्ती की आँखों से तो मानों नींद ही उड़ गयी हो.उस उसने दूसरी सिगरेट सुलगाई. सारी रात उसने चांग के लंड और उसके मुठ को याद कर कर के 7 -8 बार बिस्तर पर ही मुठ मारते मारते और सिगरेट पीते पीते गुजार दी. रात भर में ही उसने सिगरेट का पूरा पैकेट ख़तम कर दिया. लेकिन उसकी आँखों में नींद की एक झलक तक नही आई. वो रात भर लाईट जला कर अपने बेटे के लंड को निहारती रही. और ये सोचती रही कि अब और ज्यादा देर तक इस लंड को अपने चूत से जुदा नही रख पायेगी. अब दोनों के बीच सिर्फ पेंटी की दीवार बची थी. उसने ये फैसला कर दिया था कि कल ही वो अपने बेटे के सामने पूरी नंगी होगी और जल्द ही अपने चूत को अपने बेटे के लंड से मिलन करवा देगी जिस से दोनों की इच्छा पुरी हो जायेगी और दोनों के ही जीवन में बदलाव आ जाएगा. सुबह होने से पहले बसंती ने पेंटी पहन लिया.

    उस रात चांग के कारखाने से आने के बाद बसंती ने उसे स्वादिष्ट भोजन कराया. खाना – पीना खा कर वो सिर्फ पेंटी पहन कर अपने नंगे बेटे के बगले में लेट गयी सिगरेट पीती हुई

    चांग भी सिगरेट पी रहा था. उसने एक हाथ अपनी माँ की चूची पर रखा और दबाने लगा. बसंती ने भी एक हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी. तभी चांग की नजर अपनी माँ की पेंटी पर गयी. आज वो आराम से अपनी माँ को पुरी तरह नंगा कर देना चाहता था. उसके लपक कर पेंटी पर हाथ लगाया और सहलाने लगा. बसंती के होठों पे मुस्कान आ गयी. अचानक चांग ने पेंटी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके चूत का मुआयना करने लगा. बसंती के चूत पर के घने घने बाल को खींचते हुए चांग ने कहा – ये बाल शेव क्यों नही करती हो तुम?

    बसंती ने कहा – कभी की नहीं हूँ. तू ही कर दे न.

    चांग – हाँ, ठीक है.
    .
    बसंती ने उसका शेविग बॉक्स में से रेजर निकाला और चांग को थमा दिया.

    चांग ने कहा – अपनी पेंटी उतार.

    जिस शब्द को सुनने के लिए बसंती इतने दिनों से बेकरार थी आज वो शब्द उसके कानो में पड़ते ही खुशी के मारे बावली हो गयी. बसंती ने बिना किसी हिचक के अपनी पेंटी उतार दी. और अपनी टांगों को फैला कर चांग के सामने लेट गयी जिस से उसकी बाल भरी बड़ी चूत चांग के सामने आ गयी. चांग का लंड भी लोहे की रोड की तरह सख्त हो गया था. उसने अपनी माँ के चूत को भरपूर निहारा और चूत के बाल पर हाथ घसने लगा. क्या मस्त चूत हैं. बिलकूल फुले हुए पाँव रोटी की तरह. फिर उसने पानी और शेविंग क्रीम को अपनी माँ के चूत पर लगा कर धीरे धीर घसने लगा. बसंती की साँसे उखड़ने लगी. वो लम्बी लम्बी साँसे भरने लगी. उसकी चूत ने अपने बेटे के हाथ का स्पर्श पा कर पानी छोड़ना चालु कर दिया. किसी तरह से चांग अपने आप को संभाल कर धीरे धीरे रेज़र से बाल साफ़ करने लगा. चूत साफ़ करते करते वो अपनी ऊँगली चूत में भी घुसा दिया.

    बसंती ने सिसकारी भरते हुए कहा – हाय राम , ये क्या कर रहे हो मेरे बेटे?

    चांग ने उसे डपटते हुए कहा – अच्छी तरह से बाल साफ़ कर देता हूँ. कितने बाल है तेरे चूत पर. मै ये चेक कर रहा हूँ कि कि चूत के अन्दर भी तो बाल नही हैं?

    बसंती ने अब चुप रहना ही बेहतर समझा. वो नहीं चाहती थी कि अधिक टोका टोकी से कहीं उसका बेटा नाराज हो जाये और उसे जो मस्ती मिल रही है वो ना मिले. उसे अपने चूत में अपने बेटे की उंगली जाते ही मस्ती छा गयी. उसकी चूत ने पंद्रह मिनट की उंगली चुदाई के बाद पानी छोड़ दिया.

    चांग ने अपनी माँ के चूत से पानी निकलता देख पानी को चूत पर पोछते हुए पूछा- माँ, क्या तू पिशाब कर रही हो?

    बसंती ने अपनी आँखें बंद कर के कहा – नहीं रे, तुने मेरी चूत में जो उंगली घुसा दी है न इसलिए चूत से माल निकल रहा है. इस से कोई दिक्कत नहीं है. तू आराम से बाल साफ़ कर.

    एक घंटे तक अपनी माँ की चूत के बाल काटने के बहाने सहलाने और चूत में उंगली डालता रहा . इस एक घंटे में बसंती के चूत ने पांच छः बार पानी छोड़ दिया.

    इसके बाद चांग ने कहा – अब ठीक है. अब तेरी चूत एकदम चिकनी हो गयी है. ला सिगरेट निकाल.

    बसंती ने टेबल पर से सिगरेट का पैकेट उठा कर चांग को दिया. फिर चांग ने अपनी माँ को सिगरेट दिया और खुद भी पीने लगा. वो लगातार अपनी माँ के चूची और चूत को ही देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था.

    चांग ने कहा – अब ठीक है. तेरी चूत एकदम टाईट है. एक दम कुंवारी लड़की की तरह.

    बसंती – बहुत दिन से चुदाई नहीं हुई नहीं हुई हैं ना इसलिए.

    चांग ने अपना खड़े लंड को सहलाते हुए कहा – देख ना माँ, तेरी चूत देख कर मेरा लंड भी खडा हो गया है.

    बसंती ने कहा – वो तो तेरा रोज ही खड़ा होता है. ला , रोज की तरह आज भी तेरी मुठ मार दूँ..

    चांग ने हँसते हुए कहा – तेरी चूची को देख कर मै इतना पागल हो जाता हूँ कि बर्दाश्त नहीं होता. इसलिए मुठ मारना जरुरी हो जाता है . .

    बसंती ने कहा – आजा मेरे लाल, मेरे पास आ. आज मै तेरा मुठ अलग तरीके से मारूंगी .

    बसंती कह कर चांग के लंड को पकड़ ली.वो नीचे झूकी और अपने बेटे चांग का लंड को मुह में ले ली. चाग को जब ये अहसास हुआ कि उसकी माँ ने उसके लंड को मुह में ले लिया है तो वो उत्तेजना के मारे पागल होने लगा. उधर बसंती चांग के लंड को अपने कंठ तक भर कर चूस रही थी. वो अपने बेटे के लंड को इस तरह से चूस रही थी मानो गन्ने चूस रही हो. दस मिनट तक वो चांग का लंड चूसती रही . थोड़ी ही देर में चांग का लंड माल निकलने वाला था.

    वो बोला – माँ – छोड़ दे लंड को माल निकलने वाला है.

    लेकिन बसन्ती ने उसके लंड को चुसना चालु रखा. अचानक चांग के लंड ने माल का फव्वारा छोड़ दिया. बसंती ने सारा माल अपने मुह में ही भर लिया और सब पी गयी. अपने बेटे का वीर्य पीना का आनंद ही कुछ और था. थोड़ी देर में बसन्ती ने चांग के लंड को मुह से निकाल दिया. और वो बाथरूम जा कर कुल्ला कर के आई.

    तब चांग ने कहा – माँ , तुने तो कमाल कर दिया.

    बसन्ती ने बेड पर लेटते हुए कहा – तेरा लंड का माल काफी अच्छा है रे.

    बसंती और चांग बिस्तर पर लेट गए. चांग अपनी माँ के चूची और चूत को सहला रहा था. उसका लंड आधे घंटे के बाद फिर तनतना गया. उसने अपने लंड को बसंती के हाथ में थमाया और कहा – फिर से मुठ मार न.

  2. Vasna says:

    kiss kiya to sarabke badbu se Snehaki sans rukne lagi. Usi nase ke halat me unhone Snehake sare kapde bhi nahi utare aur sirf penty khilke chodne lage. Sneha ka ye peheli bar tha to use bahat dard hua. Bo dard se tadapne lagi, magar uske pati hosme hi nahi the to unka dhyan ispar gaya hi nahi.

    Fir 10-12 minit ke bad bo jhadgaye aur sara mal uske chut me chod diye aur side me behos ho gaye. Us puri rat Sneha dard se tadpti rahi. Is tarha bo apne pati se chudbate 2 jaldi hi pregnant hogayi aur us dinke bad uske patine use ajtak hat nahi lagaya. Ye sab kehete hue uske ankon me ansu agyai. Mene uske mathe kochumte hue kaha ab chinta mat karo.

    Ajse me tumhara khayal rakhunga. Tumhe pati ka sara such dungi fir mene use apne upar leta diya aur uske boobs ko chusne laga. Bo mere lund ko sahalane lagi. Uske bad usne mere kapde utardiye. Mene use bed pe letake saree ko aur uske bad peticot ko bhi khildiya. Uske pet me stiches pade the. Mene pucha to usne bataya ke uski beti ko operation karke nikala gaya he.

    Ye sunte hi me khus hogaya kiyonke uski chut abhi bhi tight hogi. Sneha ne red color ka pent pehena hua tha. Mene uske pent ko bhi nikal diya. Uske chutme bal the. Magar zyada ghane nahi the. Bo itni gori thi ki uske chut ke bal brown color ke the aur bodycolor ke sath match khate the. Dur se dekhne se pata hi nahi chalta ke chut me bal he. Mene uske chut me hat lagaya to uske muh se shhh ahhhhh ki awaz nikalte hue uski body me siharan peda hogaya.

    Zyada nahi chudbaya tha isiliye uski chut abhi bi tight thi. Mene chut ka muh kholke andar dekha to gulabi rang ki diwaren thi. Chut se pani tapak raha ntha. Me us gulabi chut ko dekhkar rehe nahi paya tut pada upar aur chusne laga. Mere chut chatne se uske body me churrent doudne laga. Bo mere balon ko pakadke apni chutme dabane lagi. Kya garam chut thi uski. Uski muh se ohh shhhh kya kar rahe ho nikal rahi thi.

    Mujhe bada maza araha tha uski chut chatne me. Ekdum rasili chut thi uski. Bo mere lund ko hatse muth mar rahi thi. Snehane bataya ke ajtak kisine uske chut nahi cahte the. Bo chudbane keliye itni bhuki thi ke 5 minit chut chatne se hi chikh 2 ke jhadgayi aur sara pani mere muh pe bhar diya. Fir mene use lund chusne keliye kaha to usne mana kardiya kiyionke usne kabhi apne pati ka lund chusa hi nahitha.

    Mere bahat samjhane ke bad hi jakar usne mere lundko apne muh me liye. Magar muh me bharte hi nikal deti thi. Use lund chusna ata hi nahi tha. Mene use kaha ke lund komuh me bharke icecream ki tarha chuso aur andar bahar karo. Fir usne esa hi kiya. Mujhe bada maza araha tha. Kiyonke bo azib tarike se lund chus rahi thi. Lund komuh me bharke cokolet ki tarha chusne lagi bina bahar nikale. Esi chusai me bahat maza ata he.

    Me unke chut pe hat fer raha tha. Chus 2 ke mere lundko lohe ki rod banadiya. Fir mene Sneha ko upar uthaya aur kiss karke bed pe leta diya. Usne kaha �aj se pehele kabhi kisika lund nahi chusa tha. Bahat maza aya tumhara lund chuske. Magar ye to bahat hi bada he. Mere pati
    ——————————————————————————–

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